ओशो सत्‍संग/ OSHO SATSANG

जोगी तु क्यों आया मेरे द्वारा। तेरी आंखों में नहीं दिखता सपनों का अब वो संसार। जोगी तु क्यों आया मेरे द्वार.......... Mansa

बुधवार, 20 जून 2018

सर्वसार-उपनिषद--प्रवचन-09

›
अज्ञान की पाँच ग्रंथियां—नौवां प्रवचन ध्‍यान योग शिविर , दिनांक 12 जनवरी रात्रि: माथेरान। सूत्र:          ...

सर्वसार-उपनिषद--प्रवचन-08

›
सुख—दुःख का स्‍वरूप—आठवां प्रवचन ध्‍यान योग शिविर , दिनांक 12 जनवरी ,   1972 प्रात: माथेरान। सूत्र:        ...

सर्वसार-उपनिषद--प्रवचन-07

›
पंच कोषों के पार—सातवां प्रवचन ध्‍यान योग शिविर , दिनांक 11 जनवरी ,   रात्रि: माथेरान। सूत्र : एतत्कोशद्वयसंसक्त मन ...
2 टिप्‍पणियां:

सर्वसार-उपनिषद--प्रवचन-06

›
पंच कोष—छठवां प्रवचन ध्‍यान योग शिविर , दिनांक 11जनवरी ,   1972 ; माथेरान। सूत्र :                     अन्नक...

सर्वसार-उपनिषद--प्रवचन-05

›
चेतना की धनी नींद और तुरिय—पाँचवाँ प्रवचन ध्‍यान योग शिविर , दिनांक 10 जनवरी 1972 रात्रि : माथेरान। सूत्र:  ...
2 टिप्‍पणियां:

सर्वसार-उपनिषद--प्रवचन-04

›
आत्‍मा की अवस्‍थाएं—चौथा प्रवचन ध्‍यान योग शिविर , दिनांक 10 जनवरी 1972 ,   प्रात: माथेरान। सूत्र :       ...

सर्वसार-उपनिषद--प्रवचन-03

›
अहंभाव ,   अविद्या और विद्या—तीसरा प्रवचन ध्‍यान योग शिविर , दिनांक 9 जनवरी ,   रात्रि ; माथेरान। सूत्र :   ...
1 टिप्पणी:

सर्वसार-उपनिषद--प्रवचन-01

›
सर्वसार उपनिषद- ओशो एक नाव दो यात्री—पहला प्रवचन ध्‍यान योग शिविर दिनांक 8 जनवरी 1972 ,   रात्रि , माथेरान। सूत्...

सर्वसार उपनिषद--ओशो

›
स र्वसार उपनिषद! असार से सार को खोज लेना भी कठिन है ;   सार में से भी सार को खोजना अति कठिन। जो व्यर्थ है उसमें सार्थक का पता लगा ल...

निर्वाण-उपनिषद--(प्रवचन-15)

›
पंद्रहवां—प्रवचन निर्वाण रहस्‍य अर्थात स्‍म्‍यक संन्‍यास ,   ब्रह्म जैसी चर्या और सर्व देहनाश ब्रह्मचर्य शांति संग्रहणम्। ब्रह...

निर्वाण-उपनिषद--(प्रवचन-14)

›
चौदहवां प्रवचन भ्रांति भंजन , कामादि वृत्‍ति दहन ,   अनाहत मंत्र और अक्रिया में प्रतिष्‍ठा               निस्त्रैगुण...

निर्वाण-उपनिषद--(प्रवचन-13)

›
तेरहवां—प्रवचन असार बोध ,   अहं विसर्जन और तुरीय तक यात्रा—चैतन्‍य और साक्षीत्‍व से                     शिवम्तुर...

निर्वाण-उपनिषद--(प्रवचन-12)

›
बारहवां—प्रवचन   सम्‍यक त्‍याग ,   निर्मल शक्‍ति और परम अनुशासन मुक्‍ति में प्रवेश                     भय मोह शो...

निर्वाण-उपनिषद--(प्रवचन-11)

›
ग्‍यारहवां—प्रवचन अंतर—आकाश में उड़ान ,   स्‍वतंत्रता का दायित्‍व और शक्‍तियां प्रभु—मिलन की और   पांडरगगनम् महासिद्धांत:।   श...
‹
›
मुख्यपृष्ठ
वेब वर्शन देखें

ओशो ने अंधकार से प्रकाश की ओर गति दि मानों अंधे को दो आंखें-जीवन जीने की कला एक साहरा एक मार्ग दिया

osho gana
मेरा पूरा प्रोफ़ाइल देखें
Blogger द्वारा संचालित.