सावन आया अब के सजन-(प्रवचन-दसवां)
दिनांक 10 जनवरी सन् 1979 ओशो आश्रम पूना।
प्रश्नसार:
प भगवान,
पल भर में यह क्या हो गया,
वह मैं गई, वह मन
गया!
चुनरी कहे, सुन री
पवन
सावन आया अब के सजन।
फिर-फिर
धन्यवाद प्रभु!
प भगवान, जीवन के हर आयाम में सत्य के सामने झुकना मुश्किल है
और झूठ के
सामने झुकना सरल! ऐसी उलटबांसी क्यों है?
प भगवान, क्या मौत पर विजय नहीं पाई जा सकती है?
प भगवान, आप सत्य को बांटने में सदा संलग्न रहते हैं।
आपकी अथक
चेष्टा देख बस मैं चकित हूं!
आप कहते
हैं चमत्कार नहीं होते।
मैं कैसे
मानूं? आप तो जीवित चमत्कार हैं!
मनुष्य की
चेतना को जगाने का ऐसा प्रयास न पहले हुआ और न आगे होगा!
मैं इस
चमत्कार को नमस्कार करती हूं।

