जो घर बारे आपना-(साधना-शिविर)
ओशो
प्रवचन-सातवां-(शक्ति के साथ आनंद भी)
इसके
पहले कि हम आज की आखिरी बैठक में प्रवेश करें, ध्यान के संबंध में दो-चार बातें
पूछी गई हैं, वह समझ लेना उचित होगा।
एक मित्र ने पूछा है कि घर जाकर हम कैसे इस विधि का उपयोग कर
सकेंगे?
पास-पड़ोस के लोगों को आवाज, चिल्लाना अजीब सा
मालूम होगा। घर के लोगों को भी अजीब सा मालूम होगा।
होगा
ही। लेकिन घर के लोगों से भी प्रार्थना कर लें, पास-पड़ोस के लोगों से भी प्रार्थना
कर आएं कि एक घंटा मैं ऐसी विधि कर रहा हूं। इस विधि से चिल्लाना, रोना, हंसना, नाचना होगा। आपको
तकलीफ हो तो माफ करेंगे। और घर के लोगों को भी निवेदन कर दें। तो ज्यादा अड़चन नहीं
होगी।
और
एक-दो दिन में लोग परिचित हो जाते हैं, फिर कठिनाई नहीं होती।


