पिया को खोजन मैं चली-(प्रश्नोंत्तर)-ओशो
दिनांक 09 जून सन् 1980,
ओशो आश्रम पूना।
प्रवचन-नौवां-(प्रश्न-सार)
01—बेइरादा नजर तुमसे टकरा गई,
जिंदगी में अचानक बहार आ गई।
मौत क्या है जमाने को समझाऊं क्या,
एक मुसाफिर को रस्ते में नींद आ गई।
रुख से परदा उठा, चांद शरमा गया,
जुल्फ बिखरी तो काली घटा छा गई।
दिल में पहले सी अब वो हलचल नहीं,
अब मुहब्बत में मिटने की घड़ी आ गई।
02—अगर एक पुरुष अपनी पत्नी से कामत्तुष्टि नहीं
पाता है तो वह दूसरी स्त्रियों के पास जाता है। ऐसा करने से वह एक अपराध-भाव अनुभव
करता है, क्योंकि उसे पत्नी से और सब सुविधाएं मिलती हैं,
और वह उन सब बातों के लिए उसे चाहता है। जब वह अपराध-भाव अनुभव करता
है तो उसका मन तनाव से घिर आता है। उसे क्या करना चाहिए कि उसका मन तनावग्रस्त न
हो अथवा उसे अपनी कामत्तृप्ति के लिए कहीं जाना बंद कर देना चाहिए?
03—आपके विवाह-संबंधी विचार सुन-समझकर, विवाह करने की इच्छा ही उड़ गई; परंतु ऐसे महत्वपूर्ण
अनुभव से गुजरे बगैर रहा भी नहीं जा सकता। मुझ त्रिशंकु का मार्ग-दर्शन करें!
04—आप दलबदल करने वाले राजनीतिज्ञों के संबंध में
क्या कहते हैं?