ध्यान योग शिविर,
दिनांक 12 जनवरी रात्रि:
माथेरान।
सूत्र:
मन आदिश्च प्राणादिश्चेच्छादिश्च सत्वादिश्च
प्रण्यादिश्चैतेपंचवर्गा इत्येषां पंचवर्गाणां
धर्मीभूतात्मज्ञानादृते न नश्यत्यात्मसन्निधौ नित्यत्वेन प्रतीयमान
आत्मोपाधिर्यस्तल्लिंग शरीरं ह्रदयग्रंथिरित्युच्यते।।7।।
तन्न यत्प्रकाशते चैतन्यं से क्षेत्रज्ञ इत्युच्यते।।8।।
मन आदि, प्राण आदि, इच्छा आदि,
कल आदि औन गुण्य आदि के
पांच समूहों को पंच वर्ग कहा जाता है।
इता पांच वर्ग के स्वभाव वाला बन कर जीवात्मा बिना ज्ञान













