दिनांक 22 जूलाई 1977;
श्री रजनीश आश्रम, पूना।
प्रश्नसार:
1—अजहूं चेत गंवार--पलटूदास जी का यह संबोधन तो सभी के लिए है; पर हम सबका एक मात्र गंवारपन क्या है? आप कृपा करके हमें कहें।
2—संत पलटूदास कहते हैं कि भागवत-धन की लूट हो रही है और जो चाहे सो लेय। यदि ऐसी बात है तो क्यों इस बात का धनी करोड़ों में एकाध हो पाता है?
3—संन्यास का फल मधुर है, फिर भी सभी उसे क्यों नहीं चखते? कृपा करके कहिए।
पहला प्रश्नः
"अजहूं चेत गंवार'--पलटूदास जी का यह संबोधन तो सभी के लिए है; पर हम सबका एकमात्र गंवारपन क्या है? आप कृपा करके हमें कहें।


