राम नाम जान्यो नहीं-(प्रश्नोंत्तर)-ओशो
मनुष्य बीज है भगवत्ता का—प्रवचन-दसवां
प्रश्न-सार:
1—शतपथ ब्राह्मण में एक प्रश्न है: को वेद
मनुष्यस्य? मनुष्य को कौन जानता है?
क्या मनुष्य इतना जटिल और रहस्यपूर्ण है कि उसे
कोई नहीं जान सकता है?
2—आप कितनी करुणावश बोल रहे हैं! उसे इस देश के
लोग नहीं समझते और क्रुद्ध होते हैं। क्या आप इतना जोखिम लिए बगैर अपना कार्य नहीं
संपन्न कर सकते?
3—आप अपनी बातों का आधार अक्सर महापुरुषों की
निंदा क्यों बना लेते हैं? अच्छा होगा यदि आप अपनी बात
विधायक रूप से हमारे सामने रखें।
4—आपने मेरी आंखें खोल दीं। आप अगर मुझ वृद्ध को
स्वीकार लें, संन्यास में दीक्षा दें और समाधि का अनुभव कराएं,
तो मैं इस धर्मशास्त्रों से भरी झोली को आज ही फेंक दूं। मेरी
करबद्ध प्रार्थना है कि आप मुझे गरीबदास झोलीवाले का पुराना नाम न दें, मैं अब गरीबी और झोली दोनों से मुक्त होना चाहता हूं।

