आइंस्टीन
का
सापेक्षवाद--
ऊर्जा
बह्मांड़—आइंस्टीन
का प्रसिद्ध
कथन है, ‘’ऐसा क्यों
है कि मुझे
कोई नहीं
समझता लेकिन
प्रेम सभी
करते है?
इसका
उत्तर भी
आइंस्टीन को
भली भांति
ज्ञात था।
कारण है उसका
सापेक्षवाद
का नियम। ई=एम सी2।
उसके समकालीन
सर्वाधिक
प्रतिभाशाली वैज्ञानिक
और गणितज्ञ भी
इस नियम को
समझने में
असमर्थ थे।
सापेक्षवाद
का यह नियम
बताता है कि
ऊर्जा क्या
है। इसमे पहले
ऊर्जा की व्याख्या
करने के लिए
बड़े विस्तृत
और जटिल फ़ॉर्मूला
उपयोग लिए
जाते थे। पहली
बार आइंस्टीन
ने इसकी व्याख्या
तीन वर्णों
में कर डाली।
समस्या
यह थी कि जटिलता
से गणित और
भौतिकी की
समस्याओं को
हल करने वाले
वैज्ञानिकों
के लिए आइंस्टीन
का यह सरल
नियम समझ के
पार था। शायद
एक जटिल मस्तिष्क
के लिए सरलता
ही जटिलतम
समस्या है।














