बीचवां प्रवचन,
30 मार्च1978;
श्री रजनीश आश्रम पूना।
प्रश्न सार :
1-प्रार्थना क्या है? और क्या प्रार्थना अपने ही लिए है?
2-अहंकार के पास भी कोई संजीवनी है क्या? जाने कहां से, कैसे और क्यों जी—जी आता है!
3-टी. यू. अंग्रेजी—विभागाध्यक्ष तथा शिवपुरी बाबा के कुछ शिष्यों के संदर्भ सहित नेपाल के एक मित्र का भगवान से प्रश्न—प्रेम के साथ इतना गहरा भय क्यों जुड़ा रहता है?
4-भगवान! अब तैयार हूं। तारीख तेरह अप्रैल को मेरा इकसठवां जन्मदिन है—आपके चरणों में संन्यस्त होने के लिए आ गिरूंगा।... आप ही मेरे शेष जीवन के एक मात्र आधार सदगुरु और इष्टदेव हो!
5-भगवान! क्या इस प्यास का कभी अंत होगा जिसने मुझे दीवाना बना दिया है?... आह! किसे मैं अपने हृदय की बात बताऊं? मैं एकदम अजनबी और नितांत अकेला हूं!

