ज्ञान से शून्य होने में ज्ञान से पूर्ण होना है—(प्रवचन—बीसवां)
दिनांक; सोमवार, 30 जुलाई 1979;
श्री रजनीश आश्रम, पूना।
प्रश्नसार:
1—भगवान,
क्या प्रभु—मिलन में विरह—अवस्था से गुजरना आवश्यक है?
2—भगवान,
मैं मृत्यु की तो बात दूर, मृत्यु शब्द से भी डरती हूं। मृत्यु से कैसे छुटकारा हो सकता है?
3—भगवान,
आप इतने प्रेम से समझाते हैं, पर मुझ अज्ञानी के पल्ले कुछ भी नहीं पड़ता। वैसे वेद, पुराण, गीता इत्यादि सब मेरी समझ में आ जाते हैं। फिर आप क्यों समझ में नहीं आते?
