सन्यास का फूल-
सन्यास की यात्रा से पहले जीवन में कुछ पडाव कुछ घटनाये
घटित होती है, जो इतनी मंद्र ओर अनछुई सी होती है कि उन्हें उस समय समझने के
लिए एक लयवदिता चाहिए। क्योंकि जन्मों की यात्रा का बीज बिना मेध या अषाढ के
अंकुरण होना कठिन है। ये कार्य गुरू के प्रेम की वर्षा ही कर सकती है। इसी लिए
हिंदुओ ने सन्यास या गुरू को एक विशेष महत्व दिया है। मैं रोज पैडो में पानी डालता
था किसी क्यारी में पूरानें पोधो के बीज गिर जाते है जो आंखों से दिखाई नहीं देते।
परंतु मैं अकसर देखता की जैसे ही बरसात का मौसम होता अषाढ के बादल मंडराते ओर
बरसात की चार बूंदे गिरी नहीं की वह पडे बीज अंकुरित हो उठते तब मैंने सोचा साल के
365 दिन मैं पानी डालता हूं परंतु ये बीज पहले क्यों नहीं अकुंरित हुए। पानी-पानी
में भी भेद है बीज की भी मर्जी है की उस के उचित महोल नहीं उत्तपन हुआ था।

