पीवत राम रस लगी खुमारी-(प्रश्नोंत्तर)-ओशो
दिनांक: 20 जनवरी, सन् 1981
ओशो आश्रम पूना।
प्रवचन-दसवां-(ध्यान का दीया जलाओ)
पहला प्रश्न: भगवान,
कहते हैं कि कामनाएं मूलतः तीन ही हैं--संभोग, संपत्ति और शक्ति की कामनाएं। शेष सब इनकी ही संतान हैं। इनमें भी फ्रायड
संभोग को बुनियादी बताते हैं; माक्र्स संपत्ति को; और एडलर शक्ति को। और हालांकि तीनों अपने-अपने ढंग से सही मालूम पड़ते हैं,
तो भी उलझन नहीं मिटती।
भगवान, फ्रायड, माक्र्स और एडलर के इस विवाद में--विवादी नहीं रहे, पर
विवाद जारी है--मैं आपको पंच चुनता हूं। क्या आप पंचायत करेंगे? यदि हां, तो आपका पंच-फैसला क्या होगा?
अखिलानंद,
माक्र्स, फ्रायड और एडलर तीनों सही भी हैं और तीनों गलत भी।
सही इसलिए कि प्रत्येक ने आंशिक सत्य को कहा है। गलत इसलिए कि प्रत्येक ने आंशिक
सत्य को ही संपूर्ण सत्य है--ऐसा सिद्ध करने की चेष्टा की है।


