कथा-सातवी -(कंफ्यूसियस मरणशय्या पर)
मैं जीवन में उन्हें हारते देखता हूँ
जो कि जीतना चाहते थे। क्या जीतने की आकांक्षा हारने का कारण नहीं बन जाती है?
आँधी आती है तो आकाश को छूते वृक्ष
टूट कर सदा के लिए गिर जाते हैं और घास के छोटे-छोटे पौधे आँधी के साथ डोलते रहते
हैं और बच जाते हैं।
पर्वतों से जल की धाराएँ गिरती हैं-
कोमल,
अत्यंत कोमल जल
की धाराएँ और उनके मार्ग में खड़े होते हैं विशाल पत्थर- कठोर शिलाखंड। लेकिन एक
दिन पाया जाता है, जल
तो अब भी बह रहा है लेकिन वे कठोर शिलाखंड टूट-टूटकर, रेत होकर एक
दिन मालूम नहीं कहाँ खो गये हैं।
परमात्मा के मार्ग अनूठे हैं। और
जीवन बहुत रहस्यपूर्ण है। इसलिए तो गणित के नियम जीवन के समाधान में बिल्कुल ही
व्यर्थ भी हुए देखे जाते हैं।



