भारत का भविष्य—ओशो
प्रवचन-बारहवां
ए टाक गिवन एट आजोल, इंडिया
डिस्कोर्स नं० १२
वाचक--गांधी जी का कभी कभी मजाक करते हैं तो ऐसा
नहीं है कि गांधी जी ने इस देश का निरीक्षण किया, पर्यटन किया और करुणा की वजह से उन्होंने जीवन में जो जरूरी थी इतनी चीजों
से चलाकर वह सादगी का विचार किया था वह करुणा की वजह से किया नहीं है वह।
ओशो—करुणा की वजह से हो या ना हो। इससे
बहुत फर्क नहीं पड़ता, मेरे लिए यह बात महत्त्वपूर्ण नहीं कि गांधी जी ने
किस वजह से सादगी अखतियार की, मेरे लिए महत्त्वपूर्ण बात यह
है कि सादगी का रुख मुल्क को गरीब बनाता है। मेरे लिए वह महत्त्वपूर्ण नहीं है। वह
गांधी जी की व्यक्तिगत बात है, वह करुणा के साधे रह रहे हैं,
या उनको कोई ओपशेशन है इसलिए साधे रह रहे हैं, या दिमाग खराब है इसलिए साधे रह रहे हैं। इससे मुझे कोई प्रयोजन नहीं है।
वह गांधी जी की निजी बात है। मेरे लिए प्रयोजन जिस बात से है वह यह है कि जो मुल्क
सादगी को प्रतिष्ठा देता है। वह मृत संपन्न नहीं हो सकता।